डंड़कस
मेनका मल्लिक
ओहि दिन सौम्याक मोन मयूर नाचि रहल छल । गप एहन रहै जे ओकर छोट भाय आ भाउजक अबैया रहै। सौम्या अपन घर-आंगनकें नीक जकां ओरिया क' राखलकि । ओकर भाय बंगलौरमें नोकरी करैत रहै ।पिछला साल ओकर विवाह भेलै । ओ कहलकै -"नहि -नहि, बागडोगरे आबि क' विवाहक पहिल वर्षगांठ मनायब । तें सौम्याक मोनमे बहुत रास बात अबैत रहै। ओकरा मोन मे पहिने सन भाव उठलैक। छोट भाय तं छैक मुदा ओ छोट भाय लेल जे कनिया ताकलिक से बुझू जेना भाउज नहि, पुतौहु तकने होअय। ।
सौम्या पी.एच .डी. क छात्रा छलि । ओ संगीतमे पी.एच .डी. कs रहल छलि । नृत्यक स'ख ओकरा नेनपनेसं छलैक । ओ सोचैत रहय- एहिबेर भाउज कतबो कहतै तं नहि नाचब । दोसर मोन कहै- नहि, भाउज तं ओकरा नचाइ-ए क' छोड़तै । भाउज ओकर नृत्यक प्रशंसक छैक। तें दू दिन पहिनहि माय कहने रहै, "सौम्या! एहिबेर तोहर नृत्य बढ़िया होमक चाही।"
सौम्या अपन आलमारी खोललिक। सोचलकि जे संध्याकाल जे पहिरति से निस्तुकी क' लिअए। एहि काजमे ओकरा बड़ समय लगैत छैक। पहिर'मे नहि लगैत छै, तय कर'मे लगैत छै जे की पहिरय? जखने ओ आलमारी खोललक, सभसं पहिने ललका बैग पर नजरि गेलै। बेगक चेन खोलि ओहिमे राखल गहना देखलकि। गहना बहार क' अपन डांड़ मे पहिरलकि। माथ नीचां मुहें झुका क' निहारलकि आ फेर गहना खोलि बेगमे राखि लेलकि। मोने मोन मुस्किआयलि। सौम्याकें अपन नेनपन मोन पड़लैक। नृत्यक स'ख ओकरा चौथे-पचमे कक्षासं रहै ।
सौम्याक पिता दंरभगासं बागडोगरा आयल रहथिन- काज-रोजगार लेल। एतs नोकरी तं नहि भेटलनि, मुदा अपन व्यवसाय शुरू करबाक जोगार लागि गेलनि। ओ व्यवसायमे नीक स्थान बनौलनि । सुखी-संपन्न भेलाह।
सौम्याकें मोने छैक। एकदिन ओ मायक डांड़मे ई डंड़कस देखने रहय। नृत्य करबाकाल ओ जे चुनरी पहरय ताहि पर डांड़ पर पातर सनक चमकैत मोतीसं गांथल डंड़कस सनक कोनो चीज बान्हि देल जाइ जे चुनरी ससरै नहि । जखन मायक डांड़मे ओ डंड़कस देखलकि, तं मोनमे अयलैक जे डंड़कस पहीरि लेने ने चुनरी गड़बड़ेतै आ ने साड़िए। आ ओ बहन्ना करs लागल जे माइए बला डंड़कस पहिरति। नहि देती तं ने नृत्य सीख' जायति आ ने मंचे पर जायति।
पिताक दुलारि धीया सौम्या। पिता ओकरा प्राणसं बेसी मानथिन। हुनका हंसी लगलनि। कहलनि, "नहि बाउ! एखन अहांकें ई नहि अंटत, नमहर होयब तं बला पहिरब। एखन चलू, अहांक नापक दोसर कीनि दैत छी । मुदा, ओ जाय लेल तैयार नहि । पिता परबोधैत रहि गेलखिन मुदा सौम्या अपन जिद पर कायम रहय। बड़ी कालक बाद माय ओ डंड़कस खोलि ओकरा हाथमे दैत बजलीह, "आइ सं ई तोरे भेलौ। नापि ले। अंटतौ तं नहि, एकरा कटा क' तोरा नापक बनबा दै छियौ।"
सौम्या अपना डांड़मे भजारलकि। बाजलि, "नहि, ई नहि कटतै। ई हम्मर भेल। तोरा राख' दै छियौ। हम नमहर हेबै तं साड़ी पर पहिरबै आ नृत्य करबै।"
"हं, तोरे भेलौ। जल्दीसं नमहर भ' जो। तखन पहिर' लगिहें।" माय बजलीह, "एकरा तोरे लेल राखि दै छियौ।"
सौम्या प्रसन्न भ' गेलि।
पिता सौम्याक मायकें कहलनि, "चलू। अहां अपना लेल दोसर कीनि लिअ।"
मुदा ओ नहि मानलनि। कहलनि जे सौम्या लेल अनामति राखि देब' सं नीक आर कोन बात हेतै?
जखन ओ पहीरि क' नृत्य करत, हमरा लागत जे हमहीं पहिरने छी।
"मुदा, हमरा लगैए जे डंड़कस पहीरि क' ओ कोना नृत्य करत? नृत्यांगना सभ जे पहिरै छै, से दोसर प्रकारक होइ छै। एत्तेक भरिगर नहि होइ छै।" पिता बजलाह।
एखनि ई बात मोन पड़ितहि सौम्या मुस्किया उठल। सांचे, ताहि समय केहन बोध रहै ओकर। नेनपनक ओ अवस्था ओकरा मोनमे गुदगुदी लगबैत रहै।
से सभ मोन पड़ितहिं सौम्याक नजरि देबाल पर टांगल पिताक माला पहिरल फोटो पर पड़लै आ मोन हहरि गेलै। अनचोकें परिवार पर वज्र कसि पड़ल रहै । पिता अपन व्यवसायक काजसं सभगोटेक संग दिल्ली जाइत रहथि। बाटेमे हुनका हृदयाघात भेलनि। जाधरि नजीकक कोनो अस्पताल लs गेलनि ता धरि ....।"
मायक मन:स्थिति पर बड़ीटा आघात भेलनि। सौम्या तकर बादसं मायक सेवामे लागल रहलि। हुनका एहि आघातसं बहरयबामे बहुतो बर्ख लागि गेलनि। ओना ई कहब मोश्किल जे ओ एहि आघातसं पूर्णतः बहरा सकलीह। मुदा, एत्तेक धरि कहल जा सकैत छै जे मोनकें बुझौलनि। करेजकें बान्हलनि।
छोट भाय पढ़ैत रहलै। सौम्या नमहर भेलि । नृत्य-साधनामे लागल रहलि। संगहि पढ़ितो रहलि। एम ए कयलकि आ प्रेम विवाह कयलकि। ओना ओ चाहैत रहय पी.एच .डी .कयलाक बाद विवाह करी, मुदा से भs नहि सकलै । ओकर ब'र सेहो सैह चाहैत रहै । एकरा दुनूक प्रेमक सुगंधि दुनू परिवारमे पसर' लगलै आ परिवारक लोक सभकें गन्ह लाग' लगलै। बागडोगरा छैके कत्तेटा जगह? परिवारक बाहरो लोक सभ बूझ' लगलै। परिवारक लोकसभ पहिने तं विरोध कयलकै आ जखन बुझयलै जे विरोधक मानि नहि भ' सकतै तं मानि गेल। मुदा, दबाओ ई जे बियाह क' लिअय। आ, दुनू प्रेमीकें परिवारक बात मान' पड़लैक।
सौम्याक ब'र एकटा प्राइवेट सेक्टरमे काज करैत छथि ।
सौम्या जीवनक रंगमंच पर तीनटा पाट अदा कर' लागलि।
ओ एकटा छात्रा छलि। नृत्य सिखैत छलि। दोसर एकटा पत्नी छलि जे पतिकें ऑफिस पठयबा लेल सभटा तैयारी करैत छलि । तकर बाद दुपहरियामे अपन पी.एच. डी.क थीसिस लिखैत छलि। आ सांझमे समय भेटै तं माय लग जाs क' मायक हालचाल पुछैत छलि। एके कालोनीमे रहने माइक हालचाल पूछब संभव भ' जाइत छलै। माइयोकें तं कतेक रोग भs गेलनि छलनि ।
भाय विवाह करs लेल नहि मानै, मुदा ओकरा मनबैत-मनबैत पिछला बर्ख ओकर विवाह करौलकि । सोचलकि, नोकरी कर' लागल, तं अपन परिवार बसाबय। मायकें किछु उसास हेतै।
सौम्याकें एहि शहरमे बहुत लोक चिन्हैत छैक। एकटा कुशल नृत्यंगनाक रूपमे ओकरा ई शहर स्नेह दैत छै। ब'रकें सेहो ओकरा पर गर्व छैक । जखन कोनो शो होइत छैक तं सौम्या मायबला डंड़कस जरुर पहिरै-ए आ जतs जाइए ततs सं नीक क' क' अबैए। जखन ओ डंड़कस पहिरैए तं ओकरा लगै छै जे माय आ बाबू दूनू ओकरा संग छथिन ।
भाय एलै । भाउज एलै । घरमे रमन-चमन होइत रहलै । आ ओहिदिन ओकर विवाहक पहिल वर्षगांठ रहै । किछु गोटे, मने परिजन-पुरजन नोतल गेल छलाह । कार्यक्रम सन्ध्याकाल रहै ।
ओकर भाय अपन पत्नीसं कहलक, "हम चाहै छी जे आइ अहां देशी लुक मे पार्टीमे रही।"
"देशी लुक माने?"
"माने परम्परागत रूपें पहिरू-ओढू। परम्परागत गहना-गुड़िया पहिरू। आर की?"
"ई की फुरायल अहांकें? तेहन गहना सभ अछि कहां? मम्मी जी अपन बला जे देने रहथि, तकरा सभ के अहीं देहाती कहि बदलि क' डिजाइनर ल' अनलियै। आब कीदन-कहांदन कहै छी। से सभ नहि होयत हमरा बुतें। हम जहिना छी, सैह हमरा नीक लगैए।"
पति कोठरीसं बहरा गेल।
सौम्याक भाय अपन मायसं गप कयलकै । दिन-दुनियाक गप-सप भेलै । एही क्रममे ओ बाजल, "माय गे! आइ अपन पुतहुकें कोन गिफ्ट देबही ?"
"से तोरा किए कहियौ?"
बेटा बाजल, "अबस्से कोनो गहना लेने हेबही।
माय कहलखिन, "गहना सभ तं देनहि छियौ । आब हमरा लग की अछि? गहना-गुड़ियाक स'ख-सेहन्ता हमरा किएक रहत? आइ ने काल्हि कनिये कें होयतनि, तें द' देलियनि।"
"मुदा, पिंकी कें तों जे गहना देने रही ताहिमे तोहर बला डंड़कस तं नहि रहौ।" बेटा बाजल।
"से तोरा बुझल नहि छौ जे डंड़कस दीदी के देने छियौ।" माय कहलनि।
"मुदा सासुक चीज पुतहुए कें ने हेतै ।"
माय अवाक्। सोचलनि - सभटा बात बेटाकें बुझल छैक जे डंड़कस सौम्याकें देल गेल छैक। ओकर बाबूओकें इच्छा रहनि जे डंड़कस सौम्याकें देल जाइ तथापि एना किएक बजैत अछि? ओ कहलनि, "बाउ रे! डंड़कस दीदी पहिरैत छौ, ओकरा लेल ओ शगुनिया छै। ओकरा ओ हमरा दुनूक आशीर्वाद मानैत अछि। जतs - जतs ओकर शो होइत छैक, ततs-ततs ओ ओकरा पहिर क' जाइत अछि, से ओकरा बड़ नीक लगैत छैक ।"
बेटा चुप । माय बजलीह, "आ ई जरूरी छै जे सासुक चीज पुतहुएके भेटै? मायक चीज बेटी के नहि?"
बेटा गंभीर भ' गेल, "मुदा, घरक परंपराकें बेटे पुतहु आगू ल' जाइत छैक ने । बाप-पुरखा के चीज-वस्तु बेटे-पुतौहु जोगा क' रखै छै ने।"
मायक मोन भेलनि जे बेटाकें कहथि जे पहिलुका देल गहना सभकें जे कयलक से हुनको बुझल छनि। पुतौहु कहने रहनि। सोनकें बदलि क' टलहा अरजलक। आब...। मुदा, कहलखिन नहि।
मायकें चुप देखि बेटा बाजल, "हमरा विचारे दीदीसं डंड़कस मंगा लेबाक चाही।"
मायकें लगलनि जे पयर तरसं जेना जमीन ससरि गेल होनि। ओ ने धरती पर ठाढ़ छथि ने आकास सं लटकल छथि। कत' छथि से नहि पता चललनि। अपन दर्दकें पीबैत ओ बजलीह, "ई काज नहि हम करब। ओहो तोरे सन संतान अछि हमर। जखन तोरा मोनमे एहन बात छौ, तं चल बजार। एखन समय छैके। हम कनियां लेल एकटा डंड़कस कीनि दैत छियनि ।"
बेटा कहलकनि, "तखन तोहर चीज कोना भेलै? कहां भेलै तोरा देहक पहिरल निशानी? पाइ तं दीदीयो लग छै, ओहो अपना लेल कीनि सकैत अछि। हमहूं पिंकी लेल कीनि सकैत छलहुं। मुदा ....।"
जखन माय लग कोनो चालि नहि सुतरलै, तं एकटा नव चालि चललक। बाजल "माय गे ! कम सं कम आइयो भरि लेल दीदी सं मांगि ने ले ।"
मायकें लगलनि जेना बांचलो सुल्फी करेजमे भोंकि देलकनि बेटा। बजलीह, "बाउ रे! हमरा आब से साधंस नहि अछि जे ओकरासं हम मांगब । तोहर जेठ बहिन छौ, मुदा हमर बेटीए नहि, जेठका बेटो वैह अछि । ई काज हमरा बुते नहि हेतौ।"
माय झूर-झमान भ' गेल छलीह। कोठरीमे गेलीह आ ओछाओन पर पड़ि रहलीह। मोने-मोन पतिकें उपराग दैत रहलीह जे हमरो अपने संग किएक ने ल' गेलहुं?"
संध्याक कालक कार्यक्रम शुरू होमय बला रहै। तैयारी चलैत छलै। नोतहारी सभ जुम' लागल छल।
बेटा भीतरिया कोठरीमे पिंकीकें कहैत छल, "हे लिअ, ई पहिरू। देखू एहिमे अहां केहन लगैत छी?"
पिंकी डंड़कस हाथमे लेलनि आ बजलीह, "हम पहिनहि कहने रही जे ई हम नहि पहिरब। अहां दीदीसं कोन मुहें मंगलियनि ई? हे दैव।"
तखने माय कोनो काजसं खोंखी करैत ओहि कोठरीमे गेलीह। बेटा-पुतौहुक स्थिति देखलनि। गप सुननहि रहथि। रहल नहि गेलनि। बजलीह, "मांगि अनलही रौ....?"
"हं... हम दीदीकें कहलियै जे मायक मोन छै जे पिंकी पहिरै। दीदी हमरा दs देलकै । दीदी हमरा मानैत छै ने।"
मायकें लगलनि जे ओ ठामे गड़ि जयतीह।
पिंकीकें बुझयलनि जे हुनका हाथमे भरिगर पाथर होनि।
कार्यक्रम शुरू होयबाक रहै। भेलै। सौम्या नहि पहुंचल रहै। अतिथि सभ ओकरे तकैत रहथि। मायकें होनि जे कोन मुहें बेटी लग ठाढ़ होयब।
"सौम्या नहि अयलीह एखनि धरि?"
बेटा बाजल, "दीदी अबिते हेतै।"
सभ देखलक जे सौम्याक ब'र एकसरिए कोठरीमे आबि रहल अछि।
"अहां असगरे? सौम्या?"
"तैयार छलीह। पता नहि की भ' गेलनि? हमरा कहलनि जे अहां जाउ। हमर पयरे ने उठि पाबि रहल अछि।"
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