कथा
छिटकी
प्रदीप बिहारी
लोक सभ ओकरा मोछू कहैक। जें ओकरा मोछू कहैक, तें ओकर किराना दोकानक नाम 'मोछुक दोकान' पड़ि गेलैक। ओकर किराना दोकान ताहि समय ओहि चौक परक सभसं पैघ आ चलती बला दोकान छलैक। कॉलोनीक नीक-नीक लोक ओकरे ओहिठाम कीन- बेसाह करय। प्राय: सभ कथू भेटैक। ओहि दोकानकें किछु गोटें 'लटगेना'क दोकान सेहो कहय। बुझू जे एक समयक 'जेनरल स्टोर' छल ओकर दोकान।
बहुत दिन धरि विभाष दासकें ई बूझ'मे नहि अयलैक जे लोक ओकरा मोछू किएक कहैत छैक? मोछ तं ओकरा छैके नहि। क्लीन अछि। ओना क्लीनो नहि कहक चाही। ओ जखन देखय तं ओकर मोछ-दाढ़ी बढ़ले देखय। ताहिपर एकदिन पूछि देने छल, "मोछू जी, दाढ़ी किएक बढ़ौने छी? लोककें दोसरे बात मोनमे अबैत छै।"
"फुरसतिए नहि होइए। ओहुना दिने-दिन दाढ़ी कटा क' की हेतै? पाइएक बर्बादी ने। तें पनरह दिन पर कटबै छी।"
"ओs। एक टा बात नहि बुझलहुं।" विभाष पुछलक।
"की?"
"मोछ तं अहां रखिते ने छी, तं लोक मोछू किए कहैए?"
"बड़ी टा खिस्सा छै। मुदा, संछेपे मे कहै छी।"
आ, मोछू सुनाब' लागल- "हमरा मोछक बड़ स'ख। मुदा, जनमबे ने करय। एकबेर छठिमे हमरा गाम मे नाटक भेलै। ओहिमे बलदेब बाबा जमींदार के पाट खेलेलखिन। हुनका बड़ी टा मोछ पहिरने देखलियै। ओ छोटका क्लिप सs बुलकीक जगहपर मोछ लटकाबथि। गोन सs साट' नहि देथिन। नाटकक बाद उखाड़' मे बहुत दर्द होनि।
नाटकक प्रात: भेने ओ मोछ दलानपर खसल देखलियै। हम उठा क' लगा लेलहुं आ जमींदार जकां बजैत अंगना जाइत रही कि हमर छोटका पित्ती देखि लेलनि। हाक देलनि। हुनक कड़गर आवाज सुनितहिं हमर सिट्टी-पिट्टी गुम। ठामहि ठाढ़ भ' गेलहुं। ओ बजौलनि। हम घुरि क' हुनका लग गेलहुं। ओ तरंगल छलाह। शुरू भ' गेलाह हाथे-पयरे। ओध-बाध क' देलनि। मोछ घिचबा लेल हाथ बढ़ौलनि, मुदा हम अपन हाथ नाक पर रखने रहलहुं। हमहूं जिदपर जे मोछ हटाब' नहि देब। मारि खाइत रहलहुं। लोक सभ जमा भ' गेल, मुदा सभ तमस्से देखैत रहल। अंतत: ओ जितलाह। मोछ एहि तरहें घिचलनि जे ओकर क्लिपे टुटि गेलैक। नाकमे भोंकाइयो गेल। आ..."
"की?"
"तहिए सं हमरा खौंझाब' लेल लोक सभ 'मोछुआ' कह' लागल।"
विभाष आ मोछुक बयसमे अन्तर छैक। करीब पनरह बरखक जेठाइ-छोटाइ, मुदा व्यवहार मित्रवत्। विभाष दोकान पर आबय तं कखनो एहन नहि बुझाइक जे मोछू खाली बैसल अछि। लगैक जेना ओकरा पयरमे घुरघुरा पैसल होइक। खने समानक दाम काटि गल्लासं गाहककें पाइ घुमाबय, तं खने कोनो हथलग्गू समान रैकपर सं उतारय। एक टा सहयोगी रखने छल। ओकर नाम रखने छल मनेजर, मुदा ओकर काज रहैक जोख-तौल कर' बला। बस, दुइए गोटेसं दोकान चलबै छल। चौकपरक एकमात्र दोकान छलैक, तें सुस्तयबाको समय कम भेटैक। योगी जखन स्कूलसं आबि क' गल्ला लग बैसैक, तखन भोजन कर' जाय।
योगी ओकर जेठका बेटा छैक। छौंड़ा पढ़'मे मोन नहि लगबैक। खेलौड़िया रहैक। मोछू डांटो-डपट करैक, मुदा छौंड़ा सोझ होइ के नामे ने लिअए।
विभाष प्राय: दुपहरियामे ओकर दोकानपर जाय। दुपहरमे भीड़ थोड़ेक कम होइक। ताहि समय नीक-बेजाय बतिअएबाक समय भेटि जाइक। मोछू सेहो कने 'रिलैक्स' होअय। विभाषकें जइतहिं मोछू दराजमे राखल कने टा डिब्बासं एक टा छोटकी इलायची बहार करय आ तरहत्थी पर राखि विभाष दिस बढ़ा दिअय। आनो गाहक सभक सत्कार एहिना करय ओ। तें लोकप्रिय छल। लोकप्रियताक दोसर बात इहो छलैक जे हींगसं हरदि धरि ओकरा दोकानमे भेटि जाइक। एक टा आर गुण रहैक। ओत्ते टा दोकानमे कोन समान कोन ठाम राखल रहैत छलैक, से ओकर दिमागमे टांकल रहैत छलैक। केओ मांगलक कि मनेजरकें कहि दिअय- 'हे, ओइ ठाम छै। दही।'
एकदिन विभाष कहने छलैक, "मोछू जी! चौकपर दोसर किराना दोकान खुजि रहल अछि।"
"खूज' दियौ। बजारमे दोकान जत्ते बढ़ै छै, बिक्रीओ ओहिना बढ़ै छै।"
"सैह कहलहुं।"
दोसरे सप्ताह एक टा गाहक समान लैत काल मनेजरसं पुछलक, "ऑफर कोनो छै कि नहि?"
मनेजर मोछू दिस संकेत कयलकै, तं ओ गाहक वैह प्रश्न दोहरौलक।
पहिने मोछुक दिमाग घुमलैक। मुदा, नियंत्रित होइत बाजल, "सर, ऑफर के चक्कर मे नहि पड़ू।"
"नबका दोकानमे भेटि रहल छै, तें पुछलहुं। अहां ओहिठाम नहि हेतै तं लोक ओम्हरे जायत ने। कोनो उठौना थोड़े लैत छी। लोक नगदा-नगदी लेत तं..."
मोछू बिच्चहिंमे रोकलक हुनका, "देखियौ सर। एहन चीजक मांग करू जे दोकनदार अपना दिस सं दिअय। जे अहीं सं काटि क' अहीं के दिअय, तइ लेल एत्ते दिनक सम्बन्ध किए खराप कर' चाहै छी। हम अप्पन लोक बुझैत रहल छी अहां के, तें कहलहुं। आ, अहीं के की? सभ गाहक के हम परिवारक लोक बुझै छी।"
"ई कोना कहै छी अहां?
"कनिए सोचबै अहां तं बुझा जायत। ऊपर सं देना आ भीतरे-भीतर लेना। ई काज हम नहि क' सकै छी। एहन काज ने कहियो कहलहुं आ ने करब। तखन हम एकटा काज करब, से आइए, एखने स'। ओकरा ऑफर बुझि सकै छी।"
"कोन काज?"
"अपने कार स' अयलियैए?"
"हं, ओम्हर पार्क कयल छै। एम्हर जगहे ने छै जे अनितियै। ओम्हर लगौने छियै।" कने फटकी दिस संकेत करैत ओ गाहक बाजल।
"एत्तेक भारी समान कोना ल' जेबै?"
"जेना ल' जाइत रहलियैए, आर केना?"
"नहि, गाड़ी धरि समान पहुंचाएब हम्मर काज। हमरा दिस स' यैह सेवा। यैह ऑफर ।" मोछू मनेजर दिस तकैत बाजल, "मनेजरा! साहेब के समान उठो आ पहुंचा दहून गाड़ी धरि। आइ स' सेवा शुरू। ज' कोनो गाहक के स्कूटर अपन दोकानो के सोझा रहतै, त' ओत्तहु ई सेवा देनाइ छै। ...जइयौ सर।"
गाहक सामान्य भेल। सोचय लागल- गाहक के आर की चाही। नीक बोली-बानि। सत्कार। पाइ तं सभ लैते छै।
मनेजर सोचैत छल- बैसल-बैसल फरमबै छै मोछुआ। दोकान पर इस्टाफ छैहे ने आ सेवा बढ़ौने जाइ छै।
मोछू सोचैत छल- ऑफर के काट एहिसं भ' सकैत छैक। मुदा, ओहो जं ई सेवा शुरू क' देत तखन?
ओकरा पिता मोन पड़लखिन। कहथिन- गाहक के थथमारि क' राखब ने बहादुरी। गाहक हवा-बसात होइ छै।
योगी मेट्रिक पास कयलकै, तं मोछुक खुशी आकास लागि गेल रहैक। जहिया रिजल्ट भेलैक, तहिया दिनभरि जतेक गाहक ओकरा दोकान पर अयलै, सभकें इलाइचीक बदले एकहक टा लड्डू बांटलक। ई बात कनिये कालमे पूरे बजार आ कॉलोनीमे तार जकां पसरि गेलैक। ओहिदिन बहुत गाहक आयल रहैक ओकरा दोकान पर। किछु तं चॉकलेट कीन' आयल आ ओहि संग लड्डू सेहो ल' क' गेल।
मोछू के दू टा खुशी भेलैक। एक ई जे सर-कुटुम मे मान बढ़लैक। ओकरा परिवार आ सर-कुटुममे मेट्रिक पास कयनिहार योगी तेसर बच्चा छल। बाकी सभ मेट्रिक पास कर'सं पहिनहिं दोकानक गद्दी ध' लेने छल।
दोसर खुशी ई जे आब योगी ओकर बांहि पुरतै। दोकान पर बैसतै। दुनू बा-पूत बिजनेस बढ़ाओत।
मुदा, सांझ होइतहिं दोसर खुशी फुर्र भ' गेलैक। दिन भरिक व्यस्तताक कारणें भोजन कर' घर नहि जा सकल छल। से, पत्नी जलखै ल' क' दोकाने पर आबि गेल छलैक। ओ पत्नीकें अपन दोसर खुशीक बात कहलक। पत्नी तरंगि गेलि, "से नहि हेतै। जोगिया कौलेज मे पढ़तै। पड़ोसिया सब कहै छलै- पढ़बहक आगां। नो नौलेज, बेदाउट कौलेज। ई बात नहि मानबै हम। बरू एक टा इस्टाफ आर राखि लहक।"
तखनहिं विभाष सेहो पहुंचल। ओकरो तरहत्थीपर लड्डू पड़लै। मुंह मिट्ठ कयलक। समाचार सुनलक। दुनू प्राणीक बीचक असहमति सुनलक। ओहो सलाह देलक जे योगीकें कॉलेज पठाओल जाय। पढ़ाएब जरूरी छै।
मोछू अल्पमतमे आबि गेल।
योगीकें कॉलेजक बसात लगलैक। इन्टरमीडिएटक परीक्षा देलाक बाद योगीकें दोकान पर बैस' पड़लैक।
योगीकें दोकानपर बैसब मोछूकें विजय सन लगलैक।
विभाष आब पहिने जकां दोकानपर नहि आबि पाबय। व्यस्तता बढ़ि गेलैक। बहुत दिन पर आयल तं देखलक जे-
विभाष देखलक जे मोछू तामसे आन्हर भेल छल। ओकर पत्नी बरसि रहल छलि- "जुआन बेटा पर हाथ उठबैत कनियो सोचलहक नहि। धियापुता के माय-बाप मारै छै, त' ओ नमहर होइत-होइत बिसरि जाइत छै। जुआन के त' मोन रहि जाइ छै। ई नीक नहि केलहक। दोकान नहि सम्हरै छह, त' घर मे बैसह। हम दुनू माइ-पूत चला लेबै दोकान। निसोखी नहितन।"
मोछुओ कहां थम्ह' बला। बजैत छल, "चलो ने। ई कुलबोड़ना बेच देतौ दोकान। बाटपर ठाढ़ क' देतौ।"
विभाष जिज्ञासा कयलक तं बुझना गेलैक जे योगी कोनो छौंड़ीकें चुपचाप फेसपैक द' देने छलैक, जे मोछू देखि लेने छल। ओकर समानक बिलमे फेसपैकक दाम नहि लिखल छलैक। छौंड़ीकें तं किछु नहि कहलक, मुदा ओकरा जइतहिं चोटिया देने छल योगीकें। तें एत्तेक भ' रहल छलैक।
मोछू बाजिए रहल छल, "पहिल दिन जहिया दोकान पर बैसल रहय, तहिए बुझौने रहियै- बेटा रे! दोकनदार के मोन आ लंगोट, दुनूपर कन्ट्रोल राखक चाही। से ई..."
"से अपना सन किए बुझलहक? दुनू के उमेर एक रंग छह? जुआन-जहान छै, बच्चा छै, किछ ऊंच-नीच त' भैए जाइ छै। फेसेपेक देलकै ने, तोहर माथा नहि ने खसेलक'। तइ लेल थोपिया देलहक। बाह रे बाप!"
योगीके रहल नहि गेलैक। बाजल, "हमर कॉलेज के फ्रेण्ड छै। ओकरा लग पूरा पाइ नहि छलै। उधारी मंगै छलै। हम द' देलियै। कहलियै जे उधारी किए लेबें। हमरा दिस स' गिफ्ट बूझ।"
"गिफ्ट लोक अपन कमाइ पर दै छै कि बापक कमाइ पर?"
"बाप ककर छै, बेटे के ने। संगी के मदति क' देलकै, तं की भेलै?" पत्नी बाजलि।
"से हमरा कहि क' दितै ने। चोरा क' किए देलकै?"
"हम अपन गलती मानै छिअ। आब एना नहि हेतै। हम पाइ मांगि क' आनि देबह।"
योगी ओत'सं बहरा गेल।
विभाष सभ किछु देखैत रहल। स्थिति सामान्य भेलाक बाद मोछुक संग बड़ीकाल धरि बतिआइत रहल।
किछुए मासक बाद लोक देखलक जे योगी दोकानपर बैस' लागल अछि। ई स्थिति लोक सभक लग प्रश्न चेन्ह जकां सेहो ठाढ़ भ' गेल छलैक। मुदा कोनो उतारा नहि भेटलैक।
विभाष समय-समय पर अबैत रहल। मोछूसं कहियोकाल भेंट होइक। बेसी काल योगिए भेटैक। ओकरेसं गपशप करय। ओकरा ई नीक लगलैक जे योगी अपन माथ उठा लेने छल। दोकानदारी सम्हारि लेने छल। इहो नीक लगलैक जे जखन कखनो मोछू अबैक तं योगी गल्लापरसं उठि जाय। कातमे अपन स्टूल लगा लिअय। नीक तं इहो लगलैक जे बापे जकां योगी सेहो ओकरासं नीक-बेजाय गप कर' लगलैक आ भैया कह' लगलैक।
मोछुक दोकानमे रहि-रहि क' लोक नव-नव बात देखय। जे सेवा एकरा ओहिठाम पहिने देखाइक, से दोसर किराना दोकानमे सेहो बादमे देखाए लगलैक। एही क्रममे लोक देखलक जे योगीक दोकानक सोझां दू टा महिला तिरपाल पर गहूम, चाउर आ दालि फटकैत छलैक, बीछैत छलैक। आनो अनाज सभ सुखाय लगलैक।
अन्नक स्वच्छता बला समाद बिनु हो-हल्लाक गाहक सभक मोनमे बैस' लगलैक। योगीक ई व्यवस्था नीक लगलैक। नीक मोछूकें सेहो लगलैक। ओ आश्वस्त होम' लागल जे योगी व्यवसाय सम्हारि लेत।
चौक भर' लागल रहैक आ दोकान सभ बढ़' लागल रहैक। बजार घनगर होम' लागल रहैक।
मुदा, अनचोके मोछू सभकें उदास करैत चलि गेलैक। अप्रत्याशित। सभ चकित। एहन कोना भ' गेलैक? ने कोनो बेरामी, ने...। बुझू जे कहियो तेना भ' क' माथो ने दुखयलैक। योगी हतप्रभ। कमजोर सन भ' गेल।
पिताक मृत्युक बाद योगी फांड़ बान्हबाक तैयारी कइए रहल छल कि फोरलेन सड़क लेल अतिक्रमण हटयबाक बात शुरू भेलैक। आ, एहिमे योगीक दोकानक सिमान धरि सरकारी जग्गह बहरयलैक।
योगी सोचलक, फोरलेन बनि गेने ओकर दोकान रोडसं बहुत नीचां भ' जयतैक। ओकर नजरि चौकक नबका हृदय ताक' लगलैक। मुदा, निराश भेल। मायसं गप कयलक। विभाषकें मोनक बात कहलक आ निर्णय लेलक। ओकरा मोनमे महानगरक दोकान सभ मोन पड़लैक।
लोक देखलक जे योगीक दोकानक ऊपरमे बड़का हॉल बनि रहल छैक। द्रूत गतिसं बुझू जे फोरलेन बन'सं पहिने मौल सनक साफ-सुत्थर आ आकर्षक दोकान बनि क' तैयार भ' गेलैक। देखनुक। ओकर स्पर्द्धी सभक तं आंखिए ने थम्हैक।
गाहक सभक करमान लाग' लगलैक ओकरा दोकानमे। लोक जाय आ अपनेसं समान बीछय, सेल्समैनसं पूर्जी कटाबय आ योगी लग राखि दिअय। ओ किछु छूट दैक। भुगतान होइक आ ओत्तहि समान ल' क' एक टा स्टाफ गाहककें गाड़ी धरि पहुंचा दिअय। पिताक शुरू कयल ई पहिल सेवा ओ बन्न नहि कयने छल।
समय पर समयक पथार लाग' लगलैक। योगीक जीवनमे लोक बढ़लैक। वैह बढ़लैक, जकरा लेल बाबू मारने रहै। जेना-जेना दोकानक लोकप्रियता बढ़ैत गेलैक, परिवार सेहो बढ़ैत गेलैक।
योगी, योगी बाबू भ' गेल। मुदा, माय लेल जोगिए छल।
पितासं बेसी व्यस्त रह' लागल योगी।
प्राय: छए मासक बाद योगिए सन कतोक दोकान खुजि गेलैक। योगी चिन्तित रह' लागल। एकदिन विभाषकें कहलक, "भैया, आब गाहक किछु कम भेल जा रहल छै। सोचै छियै जे बिजनेस बदलि लियै।"
"एतेक जल्दी हड़बड़ो नहि। एहिठामक सभ सं पुरान दोकान छौ तोहर। मैदान छोड़ब उचित नहि। किछु सोच।"
आ किछुए दिनक बाद योगी सोचि लेलक। एकटा ऑटो रिक्शा लेलक आ होम डेलिवरी शुरू क' देलक। सोचलक, गाहक सुविधा लग टाका नहि देखैत अछि। आ ओकर सोचब सही भेलैक आ ओ फेर अगुआएल।
मुदा, ओकर ई सेवा विभाषकें पसिन नहि पड़लैक। ओ बुझौने रहय योगीकें। मुदा...
कतोक मासक बाद योगीक दोकान पर पहुंचल छल विभाष। देखितहिं पूछि देलकै, "बहुत दिन पर भैया...?"
"घरसं कमे बहराइ छी।"
"सरो-समान नहि जाइ छह?"
"झूठ की कहियह! आब त' दस-बारह मिनट मे ऑनलाइन शॉपिंग स' भेटि जाइ छै सभकिछु। हींगसं हरदि धरि।"
"ओकरे मारल त' हमहूं सभ मरि रहल छी।"
"बिक्री प्रभावित भ' रहल छह?"
"से त' जे से। बिक्री त' ऊपर-नीचा होइते रहै छै। मुदा, एक टा बातक डर होइए।"
"कोन बातक?"
"ओहन लोक सभक दोकान पर आयबे बन्न भ' गेलै, जकरा संग सुख-दुख बतिआइत रही। बौक भेल पड़ल रहै छी।"
विभाषकें मोन पड़लैक। ओही दिन जयमंगला स्टोर बला भाइ जी कहैत रहथिन- "आब त' रिटायर कहलह, तैयो भेंट-घांट नहि। आयल करह। गप करै लेल मोन ललचायल रहैए।"
योगी बाजिए रहल छल, "हमर बाबू सेहो अंतिम समयमे बुझहक जे बौके भ' गेल रहथिन। बतिआइ बला केओ ने रहनि।"
विभाषकें मोछू मोन पड़लैक। ओ सोच' लागल- योगीकें केहन भरोस दिअय? भाइयो जीकें कोनो भरोस नहि द' सकल छल।
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