Sunday, September 14, 2025

नव डेग (भूमिका)

भूमिका 

नव डेग
(कंचना झाक कथा-संग्रह 'नव भोर'क भूमिका)
प्रदीप बिहारी

हमरा हाथमे कंचना झाक कथा संग्रह 'नव भोर'क पाण्डुलिपि पी डी एफ रूपमे अछि। एहि नामसं हमर परिचिति जनकपुरक एकटा साहित्यिक-सांस्कृतिक समारोहमे भेल छल। ओहिठाम ई अनुवादक सत्रक विचार गोष्ठीमे आयल रहथि। संयोगवश ओहि गोष्ठीमे हमहूं रही। तें प्रथम दृष्ट्या हम हिनका अनुवादक बुझलियनि। मंचसं परिचयो यैह देल गेल छल जे ई नेपाल प्रज्ञा प्रतिष्ठानमे अनुवाद समितिक सदस्य छथि।

हम अपन अनुवाद पत्रिका 'अंतरंग' लेल हिनकासं नेपालीक किछु रचना सभक हिंदी अनुवाद लेल सहयोग लेल आ ओहि रचना सभकें पत्रिकामे प्रकाशितो कयल।

कहियोकाल साहित्यिक गपसप होइत रहैत छल आ ताही क्रममे हमरा हिनक कथाकार रूपसं परिचय भेल, तं मोन आनन्दित भेल। भेल जे नेपालमे मैथिली कथाक क्षेत्रमे एकटा भरोस आर जागल। जें कि नेपाल हमर आरंभिक कार्यक्षेत्र रहल अछि आ आब सम्बन्ध-क्षेत्रमे‌ सेहो अछि, तें नेपालमे होइत साहित्यिक गतिविधि (मैथिली आ नेपाली) आकर्षित करैत अछि आ तोष दैत अछि। तें हिनक कथा-संग्रहक पी डी एफ पाण्डुलिपि देखि मोन हुलसि गेल।

'नव भोर'मे सतरह टा कथा संग्रहित अछि आ सतरहो विभिन्न भाव-भूमिक कथा अछि। कथाकारक निर्दोष प्रयास अछि। कथा सभ पढ़ने पाठककें लगतनि जे कथाकार एहि बातक ध्यान रखलनि अछि आ प्रयास सेहो कयलनि अछि जे कथामे कोनो पासंग नहि रहि जाइक। संतुलित रहय। बैलेंस्ड।
 
संग्रहक पहिले कथा 'नव भोर' जे पोथीक नाम सेहो अछि, मे समयक संग परिवर्तनक गप क' एकटा सकारात्मक गप राखलनि अछि।  'अनुराधा' नामक उपन्यास, जे पुरस्कृत होइछ, केर पात्र अनुराधाक बहन्ने स्त्री-विमर्शक गप कहैत छथि। दाम्पत्य जखन मात्र औपचारिकता लाग' लगैत छैक, ओहिमे प्रेम आ मित्रता तकनहुं नहि भेटैत छैक, तखन अनुराधा अपना लेल बाट बनबैत अछि। स्त्री-स्वातंत्र्यक बात कहबाक प्रयास कयल गेल अछि।
 
कंचना झा जीक एहि संग्रहक बेसी कथा स्त्री-विमर्शकें नोतैत अछि। मिथिलाक स्त्रीक दशा आ स्त्रीक संग होइत पारम्परित व्यवहारक चित्रण आ ताहि परिस्थितिसं स्त्रीकें बहार क' स्वतंत्र अस्तित्व प्रदान करबाक बात ई अपन कथा मे करैत छथि। 
 
एकटा कथा अछि- गंतव्य। ई परित्यक्त दम्पतिक कथा अछि जे विवाहक बाद वा ई कही जे सम्बन्ध विच्छेदक पनरह बरखक बाद एक यात्रा क्रममे एक-दोसराकें देखैत अछि। दुनू चाह पीबा लेल जाइत अछि। चाहक दोकान पर बैसल नायिका रश्मिकें अतीत मोन पड़ैत छैक। मोन पड़ैत छैक जे कोना ओकर इच्छाक विरुद्ध विवाह भ' गेल रहैक। आ वर ओकरामे अति आधुनिका तकैत रहल आ तिरस्कृत क' एक दिन केबाड़ बन्न क' बहरा गेल। समयक संग नायिका अपन फराक आ स्वतंत्र जीवनक बाट बनबैत अछि। सफल होइत अछि, प्रतिष्ठा भेटैत छैक। नायक एकबेर ओकरा पुन: संग रहि नव जीवन शुरू करबाक आग्रह करैत छैक, मुदा नायिका तकरा नकारि जाइछ। नायिकाक निर्णय ओकर दृढ़ता कें बतबैत छैक संगहि स्त्रीक वैचारिक उच्चता सेहो देखबैत छैक।

एही क्रममे एकटा कथा 'अंतिम इच्छा' कें सेहो देखल जा सकैत अछि। मरणासन्न पत्नीक अंतिम इच्छा जे ओकर पति ओकरा मुइलाक बाद बियाह क' लिअए आ ताही लेल ओ पतिसं वचन लेब' चाहैत अछि। जीवनक उत्तरार्द्धेमे पति-पत्नीकें एक-दोसराक सभसं बेसी खगता होइत छैक। एक-दोसराक सहयोगी होइत अछि। ओहि समय धियापुता अपन-अपन काज-रोजगारमे लागि जाइछ। पत्नीकें बुझल छैक जे ओ नहि बांचति, तें पतिसं वचन लेब' चाहैत अछि जे ओ ओकरा बाद बियाह क' लिअय। नायिका उदाहरण दैत छैक जे एक गोटें कमे बयसमे विधवा भ' गेलि। तकर बाद ककरोसं बतिएबो करय तं समाज दोसरे उधबा उठा दैक। लांछने लगाब' लगैक। तेहने डर नायिकाकें अपन पतिक मादे सेहो छैक। दोसर बात ओ चाहैत अछि जे ओकर पति ओकरा बाद सुरक्षित आ निष्कलंक जीचन जीबय। पतिक प्रति प्रेमकें सेहो ई बात प्रदर्शित करैछ। कथाक अंतमे ओहि दम्पतिक दुनू संतान मायकें भरोस दैत अछि जे हुनक अंतिम इच्छाक पूर्ति होयतनि।

एहिना हिनक कथा 'सखी' एकटा फराक आयाम प्रस्तुत करैत अछि। ओ ई जे पतिक पूर्व प्रेमिकाक नाम पत्र अछि ई कथा। बियाहक बादो नायिकाक पतिक मोनमे ओकर पूर्व प्रेमिके छैक, तें पत्नी ओकरा लेल वस्तु आ निंघेस सन छैक। नायिका अपन दुख ओहि महिला कें कहैछ। एकठाम चैलेंज सेहो दैछ जे हम अपन पति कें अहां लग पठा दैत छी, जं हिम्मति अछि तं अहां दुनू गोटें रहू। मुदा, व्हाट्स एप आ मैसेंजर पर जेहन-जेहन गपसप करैत छी, से नहि करू। पति आ बच्चा देखत तं की होयत?

कथाक अंत बड़ मार्मिक ढंगे होइत अछि। नायिका ओहि महिला (पतिक प्रेमिका)कें कहैत अछि जे ओ ओकर पतिसं भेंट कर' चाहैत अछि आ पूछ' चाहैत अछि जे ओहो एकरे सन वस्तु बनि क' नहि ने रहि गेल अछि।

आत्मालापक शिल्पमे लिखल कथा अछि 'बैमनमा'। प्रसूतिएमे छोड़ि क' अनचोके पड़ाएल पतिक स्मरणक संग पत्नीक संघर्षक कथा कहल गेल अछि। पचीस बरखक बाद पतिक आयब। पत्नी द्वारा दंडस्वरूप ओकरा अस्वीकार कयल जायब कथाक क्लाइमेक्स बनैत अछि। पतिकें घुरि गेने ई निश्चिन्तताक बोध होयब जे आब दु:स्वप्न सं भेटल, एक प्रकारक मोहभंग छैक। मोनक कोनमे जं कनियो प्रेम रहल हेतैक तं ओकर अवसानक बात अंतमे देखाइत अछि। 

एहि कथाक वर्णनात्मकता पाठककें बान्हबाक प्रयास करैत छैक, मुदा कथाकें जल्दीए अपन क्लाइमेक्स पर चलि गेलाक कारण प्रभाव कने कम भ' जाइत छैक। ई कथा विस्तार मंगैत छैक। 

संयुक्त परिवारक टुटनक एकटा कथा, जे पाठककें चिन्ता आ चिन्तन लेल वाध्य करतनि, ओ अछि- 'अलग चुल्हा'। ओहुना वर्तमान समय आ समाजक संरचनामे 'न्यूक्लियर फैमिली'क चकनसारि पसरि गेल छैक। एकर लाभ-हानि लोक भोगैए, मुदा एखनुक इनारमे एत्तेक ने भांग घोराएक छैक जे मुट्ठी भरि खुशीक लेल ढाकी भरि अवसाद लोककें भारी नहि लगैत छैक। से, पारिवारिक बटवारा सन विषय ल' क' लिखल कथा 'अलग चुल्हा' आम परिवारक कथा बनि सकल अछि। कथा कहैत अछि जे व्यक्तिगत पहिचानक अहंकार केहनो सुगठित परिवारकें खण्ड-खण्ड क' दैत छैक। कथामे बड़ महीनीसं एकटा चिन्ता देखाएल गेल अछि, ओ ई जे रातिसं चुल्हा अलग भेलाक बाद आर सभक नैहरक बर्तन-बासन तं ओकरा सभसं काज लागि जयतैक, मुदा राघोपुरवालीक? हुनक अवस्था बहुत नीक नहि छनि। कमलपुरवाली कनियाक बच्चा सभ छोट छैक, ओकरा बुते भानस-भात कयल कोना होयतैक? ओकर बच्चा भुखले रहु जयतै? आ, खण्डित होइत घरक डरीड़ पर ठाढ़ि घरक मुख्य महिला लक्ष्मीक मोनमे ई चिन्ता उभरैत छैक। ओ नहि चाहैत अछि जे बटवारा होइक, मुदा कथाकार कहैत छथि जे एहिबेर ओकरो हाथसं मामिला बहरा गेल छैक। कथा पठनीय अछि।

एहि संग्रहक आन-आन कथा जेना 'सिनेहक डोर', 'मात्र एकटा गलती', 'भरदुतिया', 'हमर परदेसिया' आदि कथा सभ लोक आ समाजक चिन्ता करैत अछि। अपन सहज अभिव्यक्तिक कारणें पाठकक मोनमे जगह बनयबामे सफल होयबाक गुण एहि कथा सभमे भेटैत अछि।

एकटा बात देखल जे एहि संग्रहक कथा सभमे बहुतो कथाकें समाप्त करबा लेल कथाकार हड़बड़ीमे बुझाइ छथि। कथा सभ अपन बात कहि दैत छैक, मुदा कथाक विस्तारसं जे 'किस्सागोई'क रस बहराइत छैक, से कने कम लगैत छैक। कंचना जीक ई पहिल संग्रह छनि। अगिला संग्रहक कथा सभमे एहि बात पर अबस्से गंभीरतापूर्वक विचार करतीह। ओना पहिल संग्रहक कथा झुझुआन कतहुसं नहि छैक, हिनक भविष्यक कथाकारक मजगूत न्यों छैक।
 
कंचना झाक कथा-भूमि शहर आ महानगर बहुत कम अछि। मिथिलाक गाम बेसी अछि। मिथिलाक बदलैत लोक अछि। चूल्हि-चिनवार अछि। मानवीय संवेदना अछि। दाम्पत्य जीवनक त्रासदी अछि, प्रेम सेहो। स्त्रीक स्वतंत्रता आ आत्मनिर्भरता अछि। हिनक कथा एहन स्त्री, जकरा बाछी जकां गरदामी लगा क' ककरो हाथमे थम्हा देल जाइत छैक, केर संग ठाढ़ भ' एहन प्रचलनक विरोध करैत अछि। कथा सभमे बदलैत समयक अनुसार नव पीढ़ीक उदारता सेहो छैक। माता-पिताक एनवर्सरी मनयबामे व्यस्त धियापुता छैक। माने पुरातन आ अधुनातन मिथिला हिनक कथामे अछि। सुखद ई जे मिथिला अछि, बदलैत मिथिलाक स्वरूप अछि आ मैथिली कथामे मिथिलाक होयब बड़ी टा बात अछि।

कंचना झा जी बहुआयामी प्रतिभाक धनिक थिकीह। हिनक बायोडाटा जे हिनक विभिन्न क्षेत्रक काज सभक झलकी देखबैत अछि, सं साहित्य आ समाजक अपेक्षा हिनकासं सहजहिं बढ़ि जाइत छैक। मैथिली कथाक क्षेत्रमे सेहो पाठक हिनका दिस उमेदक नजरिए तकैत रहताह, कारण अपन पहिले कथा-संग्रहमे ई अपन दृष्टि फड़िच्छ रखने छथि। आगां जतेक बेसी लिखतीह, शिल्प मंजाइत रहतनि। 

कंचना झा जीक एहि कथा-संग्रह 'नव भोर'कें हम  'नव डेग' मानैत छी। एहि पोथीक प्रकाशन पर हम हिनका शुभकामना आ बधाइ दैत छियनि जे मैथिली कथाक क्षेत्रमे हिनक डेग बढ़ैत रहनि।
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                      बेगूसराय/31 अगस्त 2025

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