भूमिका
आम आदमीक लगक कथा
प्रदीप बिहारी
हमरा हाथमे प्रिय भाइ केदार काननक कथा-संग्रह 'अथ चैम्बर कथा'क पाण्डुलिपि अछि। पाण्डुलिपि भेटितहिं करेज सूप सन भ' गेल। से एहि दुआरें जे ई चिरप्रतीक्षित छल।
हिनक कथाकारक स्वरूप नव रचनाकार लग प्राय: ओत्तेक जगजियार नहि होयतनि, मुदा पुरान रचनाकार लग कथाकार केदार कानन चिरपरिचित आ लोकप्रिय छथि। हिनक कतोक कथा मैथिलीक विभिन्न पत्र-पत्रिकामे प्रकाशित भ' लोकप्रिय भ' चुकल अछि। एहि संग्रहक आगमन, तें महत्वपूर्ण अछि।
हिनक एहि संग्रहमे प्राय: सतरह गोट कथा अछि जे वर्ष 1979 ई सं 1994 ई.क मध्य लिखल गेल आ प्रकाशित भेल अछि। ई कथा सभ एहि समयावधिमे प्रकाशित मिथिला मिहिर, वैदेही, अनामा, अर्पण आदि पत्रिकामे प्रकाशित भेलनि। पनरह बरखमे संख्यात्मक रूपें ई सतरहटा कथा भने कम लागय, मुदा गुणवत्ताक दृष्टिकोणें सभ कथा स्तरीय कथाक शर्तकें पूरा करैत अछि। अपन प्रासंगिकता आइयो कायम रखने अछि।
उक्त कालखण्डमे देश भीषण परिवर्तनक स्थिति देखलक। एकरा सामाजिक परिवर्तन, आर्थिक संकट आ जातीय-धार्मिक तनाओक समय सेहो कहल जा सकैछ। सामाजिक चेतनाक उभार सेहो एहि कालखण्डमे देखल जा सकैछ। एहि पोथीक कथा सभ पढ़ने पाठककें लगतनि जे कथाकार एहि परिवर्तन सभक साक्षी रहलाह अछि आ अपन रचनाधर्मिताकें समाजक संग जोड़ि क' रखलाह अछि। कोनो लेखकक ई प्रयास आ प्रयोग ओकरा सभ दिन लोकप्रिय बनौने रहैत छैक।
एहि परिवर्तनक प्रभावें सामाजिक परिवेशमे लोकक व्यस्तता बढ़ब शुरुह भेल, रोटीक समस्या, बेकारीक समस्या बढ़ल आ तकर कारणें बढ़ल तनाओ, लूट, अपहरण, शोषण आ घूसखोरी। एहि पोथीक कथा सभमे कथाकार बहुत सूक्ष्मतापूर्वक तात्कालीन समयकें पकड़लनि अछि। बहुत निर्भीकताक संग व्यवस्थाक कुरूपताकें पाठकक समक्ष अनलनि अछि। बिनु कोनो राग-लपेटकें सत्यकें उजागर कयलनि अछि- जेना, जस की तस धर दीनी चदरिया...
आ, से हिनक एहि संग्रहक कथा 'नाटक', 'तामस' आ 'आतंक'मे देखल जा सकैत अछि। कथा 'नाटक'मे स्वास्थ्य विभागमे व्याप्त अराजकताकें उजागर कयल गेल अछि। अस्पतालमे भर्ती अपन भाउजिक सुश्रुषामे लागल नायक राजीवकें अस्पतालक दरबान कोना प्रेमपूर्वक अनर्गल टाका लैत छैक, से देखाओल गेल अछि। सोझे नहि मंगैत छै, मंगबा लेल नाटक करैत छैक। भोरुका दरबान रोगीकें नमहर सन सलाम ठोकैत हालचाल पुछैत अछि आ जिज्ञासा करैत अछि जे केहन मोन छनि। तकर बाद बजैत अछि - सब कुछ ठीक हो जेतै चिन्ता के बात नहि हइ। कोठरीसं बहराइत काल राजीवकें संग करैत अछि आ बाहरमे कहैत अछि- 'कोनो बात नहि। डाक्टर सभकें हम कहि देलियै। आब धीरे-धीरे मोन ठीक होइ जेतै। लाब' आब हम चलब। जतरा बना द'।'
सहानुभूतिक शब्द कहि 'जतरा बनायब' माने चाह-पान लेल टाका मांगब। दरबान कहैत छैक जे भोरे-भोर चाह ताह नहि पीबै? तहिना दोसरो दरबान पहिले सन सहानुभूति प्रकट करैत चाह आ एकटा सिकरेट लेल मुंह खोलि एकटकही मंगैत छैक। कथा-नायककें चाह-सिकरेट लेल दरबानक नाटक देखि छगुन्ता नहि होइत छनि, ओकर क्षुद्रतापूर्ण व्यवहार पर हंसी लगैत छनि। आ, नाटकक रूपमे स्वास्थ्य विभागक नंगटै देखैत छथि पाठक।
कथा 'तामस'मे रिक्शबला पर उठल नायकक तामसकें बड़ कुशलतापूर्वक प्रस्तुत कयलनि अछि। हमरा जनैत तामसक फराके मनोविज्ञान देखयबाक प्रयास छनि कथाकारक। पहिने ओत्तेक रौद आ गुमारमे रिक्शा नहि भेटब, भेटबो कयने अनर्गल पाइ मांगब नायकक तामसकें बढ़बैत छैक। मुदा ओ तामस अव्यक्त रहैछ। उचित किराया पर रिक्शा भेटलाक बाद नायकक चेहराक विजय-बोध आ पहिलुक रिक्शा बला लग बाटे जाइत काल घुरि क' ओकरा दिस तकबाक मोन बनाएब, मुदा ताकब नहि। एहि दृश्यक संयोजन कथाक क्लाइमेक्समे महत्वपूर्ण बनबैत छैक। अव्यक्त तामसक प्रस्तुतीकरण पाठककें नीक लगतनि।
कथा 'आतंक'क नायक परमाक व्यवहारसं डेरायल ओकर मित्र सभक असमंजसक परिस्थितिक निर्माण नीक जकां एहि कथामे भेल अछि। परमा सन लोक प्राय: गाममे पाओल जाइत अछि, जे बेरोजगारे रहि जाइछ वा अपन विचारधारा समाजकें मनाब' लेल अपस्यांत भ' हारि जाइछ आ ओकर व्यवहार अस्वाभाविक भ' जाइछ, हिंसक भ' जाइछ। आ, समाजक लोक ओकरासं कन्छी काट' लगैछ। मुदा, ओकर मित्र ने ओकरा संग रहि पबैछ आ ने ओकरासं फराके। एहि परिस्थितिकें उकेरैत कथा 'आतंक' पाठककें बान्हि क' राख'मे सफल होइत अछि।
एकटा कथाक चर्च कर' चाहब, ओ थिक 'परती'। ई अभावक कथा थिक, संगहि होस्टलमे रहि क' पढ़ैत एकटा छात्रक संघर्ष-कथा सेहो। घरसं महिनबारी खर्च आब'मे विलम्ब भेने कोनो छात्रक केहन स्थिति भ' सकैछ, तकर अद्भुत चित्रण अछि एहि कथामे। कथाक छोट-छोट तत्व आ क्षणकें बहुत महीनीसं वर्णित कयल गेल अछि। जेबीमे पाइ नहि रहने चाहक दोकान परक स्थिति आ मेसक बकियौता भ' गेने आन-आन छात्र सभकें भोजन क' घुरि गेलाक बाद भोजन कर' जायब। आदि-आदि। कथाक अंतमे ओ नायक एकटा बाट बनबैत अछि अपना लेल। एकटा प्रेसबला बहुत दिनसं प्रूफ देख' कहैत रहैत छलैक, मुदा ओ गछैत नहि छल। आंखिक इलाजक बाद ओकर काज ओ करत, से सोचय। मुदा, नहि। ओकरा बुझयलैक जे आंखि देखयबासं बेसी महत्वपूर्ण प्रूफ पढ़ब थिक। प्रूफ देखलासं ओकरा नियमित पाइ भेटैत रहतैक। ई कथा संवेदनशील लोककें उद्वेलित करैत छैक।
एहने एकटा कथा अछि 'फट्टौन'। एहि कथाक विषय-वस्तु सेहो अभावेक गीत सन अछि। मुदा, एकर प्रस्तुतीकरण गस्सल आ मर्मस्पर्शी अछि।
एहि संग्रहक आनो-आन कथा सभ जेना- 'उत्तेजना, अपनैती, एकरसता, सुल्फा, पौडर, आ शीर्षक कथा अथ चैम्बर कथा' आदिमे हमरा सभक चिन्हल-जानल पात्र-चरित्र सेहो देखबामे अबैत अछि, ओकर जीवनानुभूति, संयोग-वियोग आ हंसब-बाजब सेहो अछि। ई पात्र सभ पाठककें अपन कात-करोटक पात्र बुझयतनि आ तें एहि पात्र सभक कारणें पाठक कथा सभसं जुड़ल रहताह। कथा पढ़ने अपने अनुभव करब जे कथाकार आम आदमीक कतेक लगक लोक छथि, आम लोकक दुख-सुख, राग-विराग, हर्ष-पीड़ा, सोहर-समदाउनकें संवेदनाक संग देखैत छथि, गुनैत छथि आ कथाक विषय बनबैत छथि। हिनक कथा सभमे समसामयिक, वैचारिक आ यथार्थक संदर्भ मुख्य रूपसं देखाइत अछि। मानव मूल्यक ताकाहेरी, समाजक बदलैत स्वरूपक चित्रण आ परिवर्तनजन्य नीक-बेजायसं उपजल मानसिक अन्तर्द्वन्द्वक सटीक प्रस्तुति भेल अछि। केदार भाइक कथा सभमे रेखांकित करबा योग्य इहो बात अछि जे हिनक कथा मूलत: आ विशेषत: सामाजिक पर्यवेक्षण करबाक आ मानवीय तथ्य आ संवेदना धरि पहुँचबाक प्रयास करैत अछि।
एहि संग्रहमे संग्रहित कथा आकारमे सामान्य सन अछि। किछु कथा ओहूसं छोट, मुदा शैल्पिक दृष्टिएं लघुकथा नहि। पूर्ण कथा अछि। एतेक छोट आकारमे कथा लिखब एकटा चैलेंज होइत छैक। जेना- कथामे वर्णनात्मकताक निर्वहन, ओकर परिवेशक निर्माण, दृश्य-बंध, कथा-वस्तुक समुचित प्रसार, भाषा, संवाद, आदि। एकर सभक समायोजन चैलेंज होइत छैक आ ताहिमे कथाकार सफल छथि।
केदार भाइ कथा लिखलनि, कविता लिखैत छथि, अनुवाद खूब करैत छथि, सम्पादन आ प्रकाशन सेहो तहिना। खूबे। ई क्रम आब ततेक भकरार भ' गेल अछि जे कथेतर गद्य आ संस्मरण सेहो ओही गति आ ऊर्जासं लिखि रहल छथि। कार्यक्रम-संयोजन आ व्यवस्थापनक व्यस्तताक संग उक्त काज सभ समान रूपें करैत छथि, जे ककरो लेल सेहन्ताक विषय भ' सकैत अछि। मुदा...
मुदा...केदार भाइ कथा लिखब छोड़ि देलनि। ई संग्रह अद्यावधि हुनक लिखल प्राय: सभ कथा सभक संग्रह अछि। एकटा नीक कथाकारक नीक-नीक कथा सभसं साहित्यक पाठक वंचित रहि गेल अछि। एहि पोथीकें पाठकक असीम स्नेह भेटतैक, से विश्वास हमरा सहजहिं अछि। संगहि हमरे नहि, पाठकलोकनिकें सेहो भरोस रहतनि जे केदार भाइक आर नव-नव कथा पढ़बा लेल भेटतनि।
एहि कथा-संग्रहक प्रकाशनक अवसर पर हम आदरणीय केदार भाइकें शुभकामना आ बधाइ दैत छियनि।
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बेगूसराय/23/08/2025